रामायण की चौपाइयों से जीवन की समस्यायों का निवारण!

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रामायण व गीता हिन्दू धर्म के आधार हैं, ये पवित्र ग्रन्थ प्रत्येक हिन्दू के घर में होते हैं, यदि नहीं हैं तो अवश्य होने चाहिये साथ ही इन ग्रन्थों को हमें नित्य पढ़ना चाहिये। जीवन में आने वाली बाधाओं व परेशानियों के लिये हमें रामायण का अध्ययन व मनन करना चाहिये, मुमुक्षु की कामना रखने वालों को गीता-श्रीमद्भागवत का अध्ययन व मनन करना चाहिये, ऐसा महापुरूषों का कथन है। तुलसीदास कृत रामायण बाल्मीकि रामायण का सरल रूप है, इसकी चौपाईयों को आसानी से पढ़ा व कठस्थ किया जा सकता है। इसकी एक-एक चौपाई अपने आप में महामंत्र है, आइये पढ़ते हैं कि जीवन की किस बाधा के लिये हमें किस चौपाई का जाप करना चाहिये-

मंगल कार्य निर्विघ्न संपन्न हो
निम्न चौपाईयों में से किसी एक चौपाई का सुबह-दोपहर-शाम-रात को कम से कम ग्यारह बार जाप करना चाहिये, जितना ज्यादा जप बन सके उतना अच्छा है।
1-सुनु सिय सत्य आसीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।
2-सुफल मनोरथ होई तुम्हारे। राम लखन सुनि भए सुखारे।।

जब अचानक संकट आ जाये-
निम्न चौपाईयों में से किसी एक चौपाई का सुबह-दोपहर-शाम-रात को कम से कम ग्यारह बार जाप करना चाहिये-
1-दीनदयाल बिरदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।
2-पवनतनय बल पवन समाना। बुधि बिवेक बिग्यान निधाना।।
3-कवन सा काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।
4-पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।

विद्या लाभ पाने के लिये-
निम्न चौपाईयों में से किसी एक चौपाई का सुबह-दोपहर-शाम-रात को कम से कम ग्यारह बार जाप करना चाहिये-
1-जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कवि उर अजिर नचावहिं बानी।।
2-गुरू गृह गए पढ़न रघुराई। अल्प काल विद्या सब आई।।

यदि कोई समझौता ना हो पा रहा हो-
निम्न चौपाईयों में से किसी एक चौपाई का सुबह-दोपहर-शाम-रात को कम से कम ग्यारह बार जाप करना चाहिये-
1-गरल सुधारिपु असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।
2-बयरू न करै काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई।।

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